Gathering at Kargil Chowk, Patna during fast

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ANNA HAZARE JINDABAAD
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Saturday, September 10, 2011

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Sunday, September 4, 2011

मैं सत्ता के शिखर पर बैठा हूँ .........

मैं सत्ता के शिखर पर बैठा हूँ

मेरी रगों में हिटलर का खून है,
मुसोलिनी का मैं वंशज हूँ,
नाजी मेरा गुरू है,
रावण मेरा संरक्षक,
मैं सत्ता के शिखर पर बैठा हूँ .........

तुम अन्ना हो
बाबा हो
या अन्य कोई ताकतवर सामाजिक कार्यकर्ता

कुछ नही कर सकते
तुम मेरा
क्योंकि तुम कुछ नही हो

क्या है तुम्हारे पास ?
ये अदना सी जनता
जिसका अपना तो कोई बजूद ही नही है
जिसे हम
जब चाहे
हांक देते हैं
भेड़ बकरियों की तरह
जिसे हम लडाते रहे हैं
धर्म, जाति, भाषा और सम्प्रदाय के नाम पर
जिनको इस्तेमाल करते रहे हैं हम
चुनावों में

क्या बिगाड़ लोगे तुम मेरा ?.........

मेरे पास पुलिस है
प्रशासनिक अधिकारी मेरे तलुवे चाटते है
क़ानून को मैं ही बनाता हूँ
अपने और अपनों के फायदे के लिए
और जरूरत होने पर
मैं ही खुद बनाता हूँ
क़ानून से बच निकलने का रास्ता

और ये क़ानून
ये अधिकारी
ये पुलिस करती है
मेरे ही इशारे पर
अपनी अंतरात्मा को मार कर
एक पालतू कुते की मानिंद
करते है
मेरे आदेश का पालन

अगर कोई बाबा कोई अन्ना
करता है मेरी खिलाफत
करता है मेरे भर्ष्टाचार को उजागर

तो मैं
अपनी सारी ताकत लगा देता हूँ
उसके सफेद दामन को दाग दार करने में
और मेरा वादा है तुम सभी से
मैं पहुचाउंगा तुम्हे ही
जल्दी  बहुत जल्दी
जेल की सलाखों के पीछे
या फिर
मुझ में शामिल गुंडा तत्व
बहा देंगे
सरे राह
सरे आम
तेरा लहू पानी की मानिंद
और फिर मैं खुद ही
पहुच जाउंगा
तुम्हे महान
अति महान
महान कहने के लिए

अन्ना हजारे की सुरक्षा की चिंता या जासूसी!

Sep 04, 12:03 am
मुंबई, जागरण संवाददाता।
भ्रष्टाचार के विरोध में लड़ाई लड़ रहे अन्ना हजारे को महाराष्ट्र सरकार ने 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई है। लेकिन, अन्ना ने ऐसी किसी सुरक्षा को अपने लिए अनावश्यक बताया है। सवाल उठ रहा है कि सरकार को वाकई अन्ना की सुरक्षा की चिंता है या वह अपने सुरक्षा तंत्र के जरिये अन्ना की निगरानी की कोशिश कर रही है।
जेड श्रेणी की सुरक्षा के तहत एक पुलिस वाहन के साथ दो सुरक्षा अधिकारी और चार हथियारबंद सुरक्षा गार्ड मुहैया कराए जाते हैं। पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में रहते हुए या गांव से बाहर जाने पर ये लोग हमेशा अन्ना के साथ रहेंगे। अन्ना को इससे पहले भी सादे वस्त्रों में दो हथियारबंद सुरक्षा गार्ड दिए गए थे।
महाराष्ट्र गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अन्ना ऐसी किसी सुरक्षा व्यवस्था को इसलिए अनावश्यक मानते हैं क्योंकि यह उन्हें आम लोगों के बीच स्वतंत्रतापूर्वक घूमने और उनसे मिलने में बाधा बन सकती है। अन्ना के करीबी भी मानते हैं कि हाल के उनके आंदोलन के बाद उनसे मिलने-जुलने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। वह यह भी मानते हैं कि उनसे मिलने आने वालों में कोई उनके लिए खतरा भी बन सकता है। लेकिन, अन्ना ने एक बयान में कहा है कि उन्हें अपनी मौत का डर नहीं है क्योंकि सुरक्षाकर्मियों के रहते भी लोगों की हत्याएं होते देखी गई हैं।
गृह मंत्रालय के सूत्र इस बात का जवाब नहीं दे पाते कि क्या अन्ना की जान को कोई खतरा है? लेकिन, इससे पहले अन्ना को मारने के लिए 30 लाख रुपये की सुपारी देने का एक मामला सामने आ चुका है। यह सुपारी महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल रहे उन नेताओं की तरफ से ही दी गई थी जिनके खिलाफ अन्ना ने भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए थे।

Saturday, September 3, 2011

शातिर लोगों से भरी है सरकार- अन्ना हजारे

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मजबूत लोकपाल के मुद्दे पर 12 दिन के अनशन के बाद अपनी पहली सार्वजनिक सभा में अपने गांव रालेगढ़ सिद्धी में अन्ना हजारे ने आज संप्रग सरकार पर मजबूत लोकपाल लाने के प्रति ‘गंभीर नहीं होने’ का आरोप लगाया। हजारे ने कहा कि सत्ताधारी गठबंधन में ‘शातिर’ लोग और ‘शरारती’ गृह मंत्री शामिल हैं ।
दिल्ली में 28 अगस्त को अपना अनशन तोड़ने के बाद हजारे ने आज लोगों से आग्रह किया कि वे हर स्तर पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार को ‘बार-बार झटके’ दें। हजारे ने अपने हाल के अनशन के संदर्भ में कहा, ‘‘भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने के लिए हमें बार-बार ऐसे झटके देने होंगे ।’’
दिल्ली के पास के एक अस्पताल में उपचार के बाद बुधवार को अपने घर पहुंचे हजारे का यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया । हजारे के ग्रामीणों को संबोधित करने के दौरान यहां बहुत से लोग मौजूद थे । हजारे ने अपने गांव की ग्राम सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह सरकार लबाड़ :शातिर: लोगों की भीड़ से भरी है । वे मुझे अनशन करने की अनुमति नहीं देना चाहते थे और उन्होंने दिल्ली के सभी मैदानों में निषेधाज्ञा लगा दी । जब उन्होंने जे पी पार्क के लिए अनुमति दी, तो उसमें भी बहुत सी शर्तें लगा दीं ।’’ उन्होंने कहा कि उनके हाल के आंदोलन की सफलता ने साबित कर दिया है कि सरकार को लोगों की इच्छा के आगे झुकना पड़ा ।

Tuesday, August 30, 2011

शहीद दिनेश की कुर्बानी व्यर्थ नहीं होगी, दूसरा रालेगन सिद्धी बनेगा सरफुद्दीनपुर गांव


पटना,30.08.2011. बिहार के सर्फुद्दीनपुर गांव, पंचायत सिंघारा कोपरा, दुल्हिन बाजार, पटना निवासी स्व. दिनेश यादव का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग द्वारा दिल्ली से गांव होते हुए पटना स्थित बांसघाट पहुंचा जहाँ पहुंचे अन्ना समर्थक भी अपने आंसू रोक नहीं पाए. जी एम् फ्री बिहार मूवमेंट के संयोजक पंकज भूषण ने कहा की शहीद दिनेश की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जायेगी और जल्द ही सरफुद्दीनपुर गांव अगला रालेगन सिद्धी बनेगा.

विदित हो कि पटना जिले के सर्फुद्दीनपुर गांव निवासी दिनेश यादव, दिनांक २१.०८.२०११ को अपने गांव से निकले और अन्ना के समर्थन में पटना से दिल्ली को रवाना हो गया. उनके गांव के खाश मित्र सुनील कुमार सिन्हा ने पंकज भूषण को बताया कि उसने २३.०८.२०११ को दिन में ०२.०३ बजे दिल्ली से फोन से बताया की मैं यहाँ अन्ना के समर्थन में आया हूँ. और फिर उसके मित्र ने बांस घाट पर बताया कि वही मेरी अंतिम बात थी फिर शाम में जैसे हीं टी वी देखा तब पता चला कि दिनेश ने राजघाट के पास आत्मदाह कर लिया है. अंतिम लब्ज थे अन्ना जिन्दाबाद. उसी दिन उसे लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भरती कराया गया. जहाँ २९.०८.२०११ को सुबह उसने दम तोड़ दिया और अन्ना के समर्थन में बिहार का एक नौजवान शहीद हो गया. साथ हीं जानकारी हुई कि शहीद की पत्नी मल्मतिया देवी और माता श्रीमती माया देवी का बिलख बिलख कर बुरा हाल है.

स्व. दिनेश के छोटे भाई अमरजीत जो दिल्ली में एक इम्ब्रौद्री कारखाने में काम करते हैं, ने बताया कि अस्पताल में कोई देखने नहीं आया सिर्फ दो हमारे इलाके के सांसद आये थे, पुलिस वालों ने ३५००/= की मदद की, फिर एक एम्बुलेंस में शहीद के शव को रखकर गांव होते हुए पटना स्थित बांस घाट पर लाया गया, जहाँ उनके ज्येष्ठ पुत्र गुड्डू, उम्र १० वर्ष, ने मुखाग्नि दी. स्व. दिनेश ने अपने बाद पांच बच्चों, जिनमें तीन पुत्र (गुड्डू,सोहेल,अमन) एवं दो पुत्रियों (पूजा एवं भारती) को छोड़ा है. सबसे ज्येष्ठ पुत्र की उम्र १० वर्ष और कनिष्ठ की उम्र ३ वर्ष है.

शहीद के पिता विंदा यादव ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थति बिलकुल खराब है और दिनेश ही पुरे परिवार को खेती मजदूरी करके पल रहा था. अब क्या होगा ! फिर उन्होंने बताया की हमारे चार लड़कों यथा स्व. दिनेश यादव (३० वर्ष), मिथिलेश कुमार (२८ वर्ष दिल्ली में बल्ब फैक्ट्री में कार्यरत है), ब्रजमोहन (२६ वर्ष, गांव में हीं रहता है) तथा छोटा अमरजीत (१९ वर्ष) दिल्ली में काम करता है. उक्त पंचायत के मुखिया के पति बादशाह ने कहा की हमलोग भी देख रहें हैं पर पारिवारिक स्थिति बहुत ही इनकी खराब है, जिस कारण सबों से मदद की अपील है.

मौके पर उपस्थित अन्ना समर्थक प्रो. रामपाल अग्रवाल नूतन नें तत्काल अंत्येष्ठी के समय ११००/= रुपये एवं मनहर कृष्ण अतुल जी ने ५००/= की सहायता परिवार को दी. साथ में वहां उपस्थित जी एम् फ्री बिहार मूभमेंट के संयोजक पंकज भूषण ने परिवार को सान्तावना देते हुए कहा की शहीद की शहादत बर्बाद नहीं होगी, हम सभी आपके साथ हैं और हर परिस्थिति में मदद को तैयार हैं.  साथ में उपस्थित इंडिया अगेंस्ट करप्शन के साथी तारकेश्वर ओझा, डा. रत्नेश चौधरी, अतुल्य गुंजन, प्रकाश बबलू, शैलेन्द्र जी, रवि कुमार आदि नें भी शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी साथ हीं अन्य बिहार वासियों से भी अपील की इस मौके पर अमर शहीद दिनेश के परिवार के देखरेख के लिए अधिक से अधिक मदद करें.

इसी बीच पटना स्थित हमार टी वी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित प्रो. रामपाल अग्रवाल नूतन नें शहीद के पिता विंदा यादव को ११०००/=रुपये का चेक दिया और शहीद के माता पिता के भोजन खर्चे में कमी ना होने देने का बीड़ा उठाया और उनके ही पहल पर रोटरी पटना मिड टाउन के अध्यक्ष इंजिनिअर के. के. अग्रवाल  ने उनकी बड़ी लड़की पूजा जिसकी उम्र ९ वर्ष है, जो उत्क्रमित मध्य विद्यालय सर्फुद्दीनपुर के वर्ग ६ कि छात्रा है, के पढाई की खर्च निर्वाह का बीड़ा उठा लिया. अच्छी शिक्षा दीक्षा का वादा किया. साथ हीं रोटरी पटना से विजय श्रीवास्तव ने दूसरी लड़की भारती कुमारी की पढ़ाई का बीड़ा उठा कर एक साहसिक कदम उठाया है और हमारे समाज को एक सन्देश भी दिया है.

इंडिया एगेंस्ट करप्शन से जुड़े तारकेश्वर  ओझा ने जन मानस से अपील की है कि जहाँ तक हो सके हर कोई इस परिवार की मदद करे.