Gathering at Kargil Chowk, Patna during fast

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ANNA HAZARE JINDABAAD
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Saturday, September 3, 2011

शातिर लोगों से भरी है सरकार- अन्ना हजारे

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मजबूत लोकपाल के मुद्दे पर 12 दिन के अनशन के बाद अपनी पहली सार्वजनिक सभा में अपने गांव रालेगढ़ सिद्धी में अन्ना हजारे ने आज संप्रग सरकार पर मजबूत लोकपाल लाने के प्रति ‘गंभीर नहीं होने’ का आरोप लगाया। हजारे ने कहा कि सत्ताधारी गठबंधन में ‘शातिर’ लोग और ‘शरारती’ गृह मंत्री शामिल हैं ।
दिल्ली में 28 अगस्त को अपना अनशन तोड़ने के बाद हजारे ने आज लोगों से आग्रह किया कि वे हर स्तर पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार को ‘बार-बार झटके’ दें। हजारे ने अपने हाल के अनशन के संदर्भ में कहा, ‘‘भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने के लिए हमें बार-बार ऐसे झटके देने होंगे ।’’
दिल्ली के पास के एक अस्पताल में उपचार के बाद बुधवार को अपने घर पहुंचे हजारे का यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया । हजारे के ग्रामीणों को संबोधित करने के दौरान यहां बहुत से लोग मौजूद थे । हजारे ने अपने गांव की ग्राम सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह सरकार लबाड़ :शातिर: लोगों की भीड़ से भरी है । वे मुझे अनशन करने की अनुमति नहीं देना चाहते थे और उन्होंने दिल्ली के सभी मैदानों में निषेधाज्ञा लगा दी । जब उन्होंने जे पी पार्क के लिए अनुमति दी, तो उसमें भी बहुत सी शर्तें लगा दीं ।’’ उन्होंने कहा कि उनके हाल के आंदोलन की सफलता ने साबित कर दिया है कि सरकार को लोगों की इच्छा के आगे झुकना पड़ा ।

Tuesday, August 30, 2011

मौत से पहले दिनेश ने पूछा था, ”टीम अन्ना का कोई क्यों नहीं आया?”


दिनेश यादव का पार्थिव शरीर 
दिनेश यादव का शव जब बिहार में उसके पैतृक गांव पहुंचा तो हजारों की भीड़ ने उसका स्वागत किया और उसकी मौत को ‘बेकार नहीं जाने देने’ का प्रण किया। लेकिन टीम अन्ना की बेरुखी कइयों के मन में सवालिया निशान छोड़ गई। सवाल था कि क्या उसकी जान यूं ही चली गई या उसके ‘बलिदान’ को किसी ने कोई महत्व भी दिया? 
गौरतलब है कि सशक्त लोकपाल पर अन्ना हजारे के समर्थन में पिछले सप्ताह आत्मदाह करने वाले दिनेश यादव की सोमवार को मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक यादव ने सुबह लोक नायक अस्पताल में दम तोड़ दिया। यादव के परिवारजनों को उसका शव सौंप दिया गया था जो बिहार से दिल्ली पहुंचे थे।
पुलिस के मुताबिक यादव के परिवार वाले उसके अंतिम क्रिया के लिए पटना रवाना हो चुके हैं । उधर, कुछ मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 32 वर्षीय यादव की मौत पिछले सप्ताह ही हो चुकी थी। हालांकि पुलिस ने इन रिपोर्ट से इनकार किया है। गौरतलब है कि 23 अगस्त को दिनेश ने राजघाट के पास अन्ना के समर्थन में नारे लगाते हुए खुद पर पेट्रोल छिड़क आग लगा ली थी। 70-80 प्रतिशत जल चुके दिनेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जाता है कि कुछ डॉक्टरों और प्रत्यक्षदर्शी अस्पताल कर्मियों से दिनेश ने आखिरी दिन तक पूछा था कि क्या उससे मिलने अन्ना की टीम से कोई आया था?
दिनेश यादव का शव जब पटना के निकट दुल्हन बाजार स्थित उनके गांव सर्फुदीनपुर पहुंचा तो पूरा गांव उमड़ पड़ा था। सब ने शपथ ली है.. इस मौत को जाया नहीं जाने देंगे। एक पत्रकार ने फेसबुक पर लिखा है, ”मुझे लगता है टीम अन्ना को इस नौजवान के परिवार की पूरी मदद करनी चाहिए। उनके घर जाकर उनके परिवारवालों से दुख-दर्द को बांटना चाहिए।”
दिनेश के परिवार के लोग बेहद गरीब और बीपीएल कार्ड धारक हैं। कई पत्रकारों का भी कहना है कि सहयोग के लिए अगर कोई फोरम बनेगा तो वे भी शामिल होने को तैयार हैं। दिनेश के तीन बच्चे हैं। उसकी पत्नी का रो रो कर बुरा हाल है और वह कई बार बेहोश हो चुकी है। उसके बाद परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है।
उधर अन्ना हज़ारे अनशन टूटने के तीसरे दिन भी गुड़गांव के फाइव स्टार अस्पताल मेदांता सिटी में स्वास्थ लाभ लेते रहे।

Wednesday, August 24, 2011

अन्ना के खिलाफ़ नारेबाजी पर टकराव


पटना : 2.45 बजे इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कैंप के सामने युवकों की भीड़ है. वे जोर-जोर से नारेबाजी कर रहे हैं. अशोक राजपथ की ओर से करीब दर्जन भर छात्र आते हैं. उनके हाथों में तिरंगे हैं. ये एक पुतला लेकर आये हैं. कारगिल चौक पर पहुंच कर नारेबाजी करने लगते हैं.
 कैंप दो-चार लड़के पहुंचते हैं. इन्हें लगता है ये भी अन्ना समर्थक हैं. लेकिन, ये अन्ना समर्थक नहीं, बल्कि एनएसयूआइ के छात्र हैं. जोर-जोर से नारा लगा रहे हैं-अन्ना हजारे होश में आओ..लोकतंत्र पर हमला करना बंद करो. इधर, कुछ छात्र अन्ना जिंदाबाद के नारे भी लगा रहे हैं.
इस, बीच एक युवक पुतला नीचे करता है. उस पर लिखा है-मैं अन्ना हूं. उसमें आग लगा दी जाती है. एक अन्ना समर्थक की नजर उस पर जाती है. वह आग बुझाने की कोशिश करता है, लेकिन विरोधी गुट उसे धक्का देदेता है.
वह दौड़ कर कैंप की ओर जाता है. उधर से दौड़ते हुए लड़के आते हैं. तब तक अन्ना का पुतला जल कर खाक हो जाता है. अन्ना समर्थक एनएसयूआइ के छात्रों पर टूट पड़ते हैं. एनएसयूआइ के छात्र भागने लगते हैं. अन्ना समर्थक उन्हें दूर तक दौड़ाते हैं.
दो-तीन को पीटते भी हैं. अंतत अन्ना समर्थक नारेबाजी करते हुए लौटते हैं-देश के गद्दारों होश में आओ..सोनिया जिसकी मम्मी है, वह सरकार निकम्मी है. इधर, कैंप से पंकज भूषण घोषणा करते हैं, लोकतंत्र में अपनी बात कहने का सबको अधिकार है. हमें हिंसात्मक कदम नहीं उठाना है. और फिर लोग शांत हो जाते हैं.