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Saturday, September 10, 2011
Monday, September 5, 2011
A Guide to Government Anti-Corruption Tools
By Preetika Rana
The Jan Lokpal Bill championed by Anna Hazare is designed to tackle corruption in the bureaucracy. But what can individuals do to get redress when they witness graft in officialdom? For those with faith in the government’s own mechanisms to root out corruption – and we realize hundreds of thousands protested over the last month precisely because they lacked that faith – here are some options. They come with the caveat that we have not tested these processes for their efficiency, but for frustrated citizens they may provide a place to start:
Project Vigeye : Launched in December 2010 by the Central Vigilance Commission of India,
Project Vigeye is an anticorruption program that allows individuals to
lodge complaints against public officials, public enterprises, state
governments or central government ministries. Complaints can be registered
via the Internet, the telephone, or through an SMS. The project also
allows for the uploading of audio, video and photo evidence. “Demo Videos” have been set up on YouTube to help those who want to use the process.
A total of 892 complaints have been filed since the project’s inception. The first project report,
dated Jan. 11, lists a total of 93 complaints. Seven were dealt with
in less than 48 hours, 21 were forwarded to State Vigilance Commissions
and the rest were marked for further investigation.
Trap Cases: India’s
premier investigative agency, the Central Bureau of Investigation,
encourages public participation in “traps” to catch government
officials demanding bribes. The CBI monthly report for June lists six successful trap operations, executed by citizens in New Delhi, Mumbai and Chandigarh.
The CBI also operates anticorruption hotlines; to find the one in your region, check here
Right to Information Act : Enacted
by the Indian Parliament in 2005, the Right to Information Act has
emerged as a powerful tool to mobilize public opinion on issues of
national significance. Under provisions of the Act, citizens may
request information from a “public authority” which is compelled to
reply within 30 days of receipt.
The Act also requires each public department to computerize records
for wide dissemination and pro-actively publish reports to minimize the
need for citizen requests. RTIs can be filed, submitted and tracked
through the central government’s online portal.
Some estimates suggest more than one million RTIs have been filed over the last five years.
To engage public opinion and greater participation, the central government also launched an RTI fellowship earlier this year.
Portal for Public Grievances:
A central government initiative launched in 2007, the online Portal
for Public Grievances seeks to curb corruption among central and state
departments. Citizens can lodge complaints against a corrupt central or
state official or a central or state-run ministry through the portal.
Citizens can also view their application status, send reminders and seek clarification on complaints lodged through the website.
Various state governments also have initiated campaigns to combat corruption. The Maharashtra state government, for instance, launched its own “trap cases” program modeled on that of the CBI. And the Bihar Rural Development Ministry is using social media tools including YouTube to try to monitor corrupt dealings at the Indira Awas Yojana, a housing project for the underprivileged.
Have you used any of the services above? We are interested in
your experience and in whether these programs were efficient in curbing
corruption. Please let us know in the Comments.
Sunday, September 4, 2011
अन्ना हजारे : रालेगन सिद्धि का 'सिद्ध पुरुष'
अन्ना हजारे को आज भले ही
पूरा देश एक 'जन-नायक' के रूप में जान रहा हो, भले ही वे दूसरे गांधी के
रूप में चर्चित हो गए हों, भले ही जमशेदपुर के ख्यात कॉलेज में अन्ना के
आंदोलन को मैनेजमेंट के चेप्टर के रूप में शामिल कर लिया गया हो, भले ही
उनके अहिंसक आंदोलन ने पूरी दुनिया को एक नया सबक दिया हो...और भले ही इस
74 साल के 'जवान' ने समूची सरकार के साथ ही संसद को सांसत में डाल दिया हो,
लेकिन आज यह नाम एक 'ब्रांड' बन गया है। अन्ना ने अपने पैतृक गांव रालेगन
सिद्धि में जो क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं, उससे दूसरे भी प्रेरणा ले
सकते हैं।
अन्ना का गांव एक मॉडल : अन्ना ने जिस तरह से अपने गांव का उद्धार किया है, वह एक मॉडल बन गया है। उनके गांव में स्टेडियम, अस्पताल और बढ़िया स्कूल है। गांव के उत्थान के लिए अन्ना ने जो काम किए हैं, वे एक मिसाल बन गए हैं। अन्ना के रालेगन सिद्धि को बहुत कम लोग जानते थे, आज पूरी दुनिया उससे परिचित हो गई है।
अन्ना इसलिए घर नहीं आते : समाज सेवा के लिए अविवाहित रहे अन्ना हजारे 35 सालों से अपने घर नहीं गए हैं और उन्हें अपने भाइयों के बच्चों के नाम तक मालूम नहीं हैं। उनके छोटे भाई मारुति बाबूराव हजारे ने कहा कि अन्ना इसलिए घर नहीं आते कि कहीं उन पर यह आरोप नहीं लगे कि वे घर की मदद कर रहे हैं।
घर का खाना भी नहीं खाते : अन्ना के भाई की बहू ने बताया कि रालेगन में जब भी अन्ना रहते हैं तो उनका खाना सेंटर से ही आता है। कभी हम उन्हें खाना भेजते भी हैं तो वापस लौटा देते हैं। हां, कभी घर में पूरणपोली बनती है तो उसकी जरूर इच्छा रहती है कि वे उन तक पहुंचाई जाए।
अन्ना की सेहत का राज : आज 74 साल की उम्र में भी देश का यह 'दूसरा गांधी' इतना फिट क्यों है? इस सवाल का जवाब है हर काम नियम से करना और खान पान के प्रति सचेत रहना। अन्ना सुबह 5 बजे उठते हैं। 2 किलोमीटर तक पैदल सैर के लिए जाते हैं। सैर से आने के बाद वे योगासन करते हैं। वे एक वक्त ही खाना खाते हैं। सुबह और शाम नाश्ते में फल या ज्यूस के अलावा और कुछ भोज्य पदार्थ नहीं लेते।
बचपन से ही जिद्दी स्वभाव : अन्ना के परिजनों ने बताया कि आज आप जिस अन्ना को देख रहे हैं, वह किसी जिद्दी इंसान जैसा भले ही हों, लेकिन यह स्वभाव सिर्फ जन लोकपाल बिल के जरिए नहीं निर्मित हुआ, बल्कि बचपन से ही वे ऐसे ही हैं। यदि किसी जिद पर अड़ गए तो वह पूरी होने तक अड़े ही रहते हैं।
एक गांव, एक गणपति : रालेगन सिद्धि कभी भी अन्ना हजारे का ऋण नहीं उतार सकेगा। उन्होंने गांव की भलाई के लिए इतने जतन किए हैं कि उसकी फेहरिस्त बनाई जाए तो वह बहुत लंबी हो जाएगी। 22 साल पहले रालेगन में अलग-अलग स्थानों पर गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की जाती थी। एक बार गणेश विसर्जन के वक्त दो गुटों में टकराव हो गया। तभी अन्ना ने ऐलान किया - 'एक गांव, एक गणपति'।
22 साल से रालेगण में एक गणपति : अन्ना की सीख का ही यह परिणाम है कि पूरे गांव में केवल एक ही स्थान पर गणपतिजी की प्रतिमा स्थापित की जाती है, जहां पूरा गांव एकत्र होकर विघन विनाशक की पूजा-अर्चना करता है। 22 सालों में यह पहला मौका था, जब गणेश स्थापना के वक्त अन्ना वहां मौजूद नहीं थे। जब पूजा चल रही थी, तब वे खराब स्वास्थ्य होने के कारण विश्राम कर रहे थे। (वेबदुनिया)
अन्ना का गांव एक मॉडल : अन्ना ने जिस तरह से अपने गांव का उद्धार किया है, वह एक मॉडल बन गया है। उनके गांव में स्टेडियम, अस्पताल और बढ़िया स्कूल है। गांव के उत्थान के लिए अन्ना ने जो काम किए हैं, वे एक मिसाल बन गए हैं। अन्ना के रालेगन सिद्धि को बहुत कम लोग जानते थे, आज पूरी दुनिया उससे परिचित हो गई है।
अन्ना इसलिए घर नहीं आते : समाज सेवा के लिए अविवाहित रहे अन्ना हजारे 35 सालों से अपने घर नहीं गए हैं और उन्हें अपने भाइयों के बच्चों के नाम तक मालूम नहीं हैं। उनके छोटे भाई मारुति बाबूराव हजारे ने कहा कि अन्ना इसलिए घर नहीं आते कि कहीं उन पर यह आरोप नहीं लगे कि वे घर की मदद कर रहे हैं।
घर का खाना भी नहीं खाते : अन्ना के भाई की बहू ने बताया कि रालेगन में जब भी अन्ना रहते हैं तो उनका खाना सेंटर से ही आता है। कभी हम उन्हें खाना भेजते भी हैं तो वापस लौटा देते हैं। हां, कभी घर में पूरणपोली बनती है तो उसकी जरूर इच्छा रहती है कि वे उन तक पहुंचाई जाए।
अन्ना की सेहत का राज : आज 74 साल की उम्र में भी देश का यह 'दूसरा गांधी' इतना फिट क्यों है? इस सवाल का जवाब है हर काम नियम से करना और खान पान के प्रति सचेत रहना। अन्ना सुबह 5 बजे उठते हैं। 2 किलोमीटर तक पैदल सैर के लिए जाते हैं। सैर से आने के बाद वे योगासन करते हैं। वे एक वक्त ही खाना खाते हैं। सुबह और शाम नाश्ते में फल या ज्यूस के अलावा और कुछ भोज्य पदार्थ नहीं लेते।
बचपन से ही जिद्दी स्वभाव : अन्ना के परिजनों ने बताया कि आज आप जिस अन्ना को देख रहे हैं, वह किसी जिद्दी इंसान जैसा भले ही हों, लेकिन यह स्वभाव सिर्फ जन लोकपाल बिल के जरिए नहीं निर्मित हुआ, बल्कि बचपन से ही वे ऐसे ही हैं। यदि किसी जिद पर अड़ गए तो वह पूरी होने तक अड़े ही रहते हैं।
एक गांव, एक गणपति : रालेगन सिद्धि कभी भी अन्ना हजारे का ऋण नहीं उतार सकेगा। उन्होंने गांव की भलाई के लिए इतने जतन किए हैं कि उसकी फेहरिस्त बनाई जाए तो वह बहुत लंबी हो जाएगी। 22 साल पहले रालेगन में अलग-अलग स्थानों पर गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की जाती थी। एक बार गणेश विसर्जन के वक्त दो गुटों में टकराव हो गया। तभी अन्ना ने ऐलान किया - 'एक गांव, एक गणपति'।
22 साल से रालेगण में एक गणपति : अन्ना की सीख का ही यह परिणाम है कि पूरे गांव में केवल एक ही स्थान पर गणपतिजी की प्रतिमा स्थापित की जाती है, जहां पूरा गांव एकत्र होकर विघन विनाशक की पूजा-अर्चना करता है। 22 सालों में यह पहला मौका था, जब गणेश स्थापना के वक्त अन्ना वहां मौजूद नहीं थे। जब पूजा चल रही थी, तब वे खराब स्वास्थ्य होने के कारण विश्राम कर रहे थे। (वेबदुनिया)
Thursday, September 1, 2011
तीसरी आजादी कि लड़ाई- आर्थिक विषमता को रोकना- नरेंद्र
पटना,01.09.2011. अखिल भारतीय गोशाला संघ तथा अन्य संस्थाओं की ओर से आज भिखम्दास ठाकुरबाड़ी द्वारा संचालित रामानंदाचार्य विद्यालय परिसर में अन्ना हजारे समर्थक बलिदानी दिनेश यादव की स्मृति में हवन एवं श्रद्धांजलि तथा संकल्प सभा का आयोजन किया गया.
संत श्री पशुपतिनाथ वेद विद्यालय के आचार्य ब्रह्मचारी अमोलानंद एवं श्री उदय कुमार ओझा ने शांति हवन कराया जिसमें वेद विद्यालय के विद्यार्थियों के द्वारा वैदिक मन्त्रों का पाठ किया गया. इस मौके पर शहीद दिनेश यादव के ज्येष्ठ पुत्र, छोटे भाई अमरजीत एवं उनके मित्रों के साथ सर्फुद्दीनपुर गांव के कई ग्रामीण भी मौजूद थे.
साथ हीं साथ एक श्रधांजली तथा संकल्प सभा का आयोजन, अखिल भारतीय गोशाला संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रामपाल अग्रवाल नूतन की अध्यक्षता में आयोजित की गयी. इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह उपस्थित थे, जिन्होंने अन्य व्यक्तियों के साथ शांति हवन किया.
संकल्प सभा में तीन संकल्प लिए गये. अध्यक्ष श्री नूतन ने घोषणा की कि अखिल भारतीय गोशाला संघ (फेडरेशन) सम्बंधित तथा इक्षुक संस्थानों एवं अन्य लोगों तथा सरकार से आवश्यकतानुसार संपर्क कर बिहार सरकार से संपर्क कर बिहार के इस गांव को अगला रालेगन सिद्दी बनाया जायेगा, जिस क्रम में जल्द हीं एक टीम बनाकर रालेगन सिद्दी भी भेजा जायेगा.
![]() |
| कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह 5000 रुपये शहीद के पुत्र गुड्डू को देते हुए |
प्रो. नूतन ने गोशाला फेडरेशन की ओर से 11,111/= (ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह) रुपये नगद शहीद के माता-पिता के देख-रेख के लिए दिया और साथ हीं उन्होंने कहा उनके माता पिता को खाने के लाले नहीं पड़ने दूंगा.
कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी एवं जी एम् फ्री बिहार मूभमेंट के संयोजक पंकज भूषण ने किया. साथ में इस मौके पर डा. ए एन सिंह, चंद्रेश्वर पाण्डेय, सरदार कुलवंत सिंह सलूजा, तारकेश्वर ओझा, अधिवक्ता एवं समाजसेवी अरविंद कुमार, इकबाल इमाम, युवा प्रकश बबलू, मुसल्ल्ह्पुर के अन्ना समर्थक उपेन्द्र यादव तथा दाई नौकर संघ से श्री नेहाल अहमद मौजूद थे.
डा. अमरेन्द्र नारायण सिंह
9334110892
Tuesday, August 30, 2011
शहीद दिनेश की कुर्बानी व्यर्थ नहीं होगी, दूसरा रालेगन सिद्धी बनेगा सरफुद्दीनपुर गांव
पटना,30.08.2011. बिहार के सर्फुद्दीनपुर गांव, पंचायत सिंघारा कोपरा, दुल्हिन बाजार, पटना निवासी स्व. दिनेश यादव का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग द्वारा दिल्ली से गांव होते हुए पटना स्थित बांसघाट पहुंचा जहाँ पहुंचे अन्ना समर्थक भी अपने आंसू रोक नहीं पाए. जी एम् फ्री बिहार मूवमेंट के संयोजक पंकज भूषण ने कहा की शहीद दिनेश की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जायेगी और जल्द ही सरफुद्दीनपुर गांव अगला रालेगन सिद्धी बनेगा.
विदित हो कि पटना जिले के सर्फुद्दीनपुर गांव निवासी दिनेश यादव, दिनांक २१.०८.२०११ को अपने गांव से निकले और अन्ना के समर्थन में पटना से दिल्ली को रवाना हो गया. उनके गांव के खाश मित्र सुनील कुमार सिन्हा ने पंकज भूषण को बताया कि उसने २३.०८.२०११ को दिन में ०२.०३ बजे दिल्ली से फोन से बताया की मैं यहाँ अन्ना के समर्थन में आया हूँ. और फिर उसके मित्र ने बांस घाट पर बताया कि वही मेरी अंतिम बात थी फिर शाम में जैसे हीं टी वी देखा तब पता चला कि दिनेश ने राजघाट के पास आत्मदाह कर लिया है. अंतिम लब्ज थे अन्ना जिन्दाबाद. उसी दिन उसे लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भरती कराया गया. जहाँ २९.०८.२०११ को सुबह उसने दम तोड़ दिया और अन्ना के समर्थन में बिहार का एक नौजवान शहीद हो गया. साथ हीं जानकारी हुई कि शहीद की पत्नी मल्मतिया देवी और माता श्रीमती माया देवी का बिलख बिलख कर बुरा हाल है.
स्व. दिनेश के छोटे भाई अमरजीत जो दिल्ली में एक इम्ब्रौद्री कारखाने में काम करते हैं, ने बताया कि अस्पताल में कोई देखने नहीं आया सिर्फ दो हमारे इलाके के सांसद आये थे, पुलिस वालों ने ३५००/= की मदद की, फिर एक एम्बुलेंस में शहीद के शव को रखकर गांव होते हुए पटना स्थित बांस घाट पर लाया गया, जहाँ उनके ज्येष्ठ पुत्र गुड्डू, उम्र १० वर्ष, ने मुखाग्नि दी. स्व. दिनेश ने अपने बाद पांच बच्चों, जिनमें तीन पुत्र (गुड्डू,सोहेल,अमन) एवं दो पुत्रियों (पूजा एवं भारती) को छोड़ा है. सबसे ज्येष्ठ पुत्र की उम्र १० वर्ष और कनिष्ठ की उम्र ३ वर्ष है.
शहीद के पिता विंदा यादव ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थति बिलकुल खराब है और दिनेश ही पुरे परिवार को खेती मजदूरी करके पल रहा था. अब क्या होगा ! फिर उन्होंने बताया की हमारे चार लड़कों यथा स्व. दिनेश यादव (३० वर्ष), मिथिलेश कुमार (२८ वर्ष दिल्ली में बल्ब फैक्ट्री में कार्यरत है), ब्रजमोहन (२६ वर्ष, गांव में हीं रहता है) तथा छोटा अमरजीत (१९ वर्ष) दिल्ली में काम करता है. उक्त पंचायत के मुखिया के पति बादशाह ने कहा की हमलोग भी देख रहें हैं पर पारिवारिक स्थिति बहुत ही इनकी खराब है, जिस कारण सबों से मदद की अपील है.
मौके पर उपस्थित अन्ना समर्थक प्रो. रामपाल अग्रवाल नूतन नें तत्काल अंत्येष्ठी के समय ११००/= रुपये एवं मनहर कृष्ण अतुल जी ने ५००/= की सहायता परिवार को दी. साथ में वहां उपस्थित जी एम् फ्री बिहार मूभमेंट के संयोजक पंकज भूषण ने परिवार को सान्तावना देते हुए कहा की शहीद की शहादत बर्बाद नहीं होगी, हम सभी आपके साथ हैं और हर परिस्थिति में मदद को तैयार हैं. साथ में उपस्थित इंडिया अगेंस्ट करप्शन के साथी तारकेश्वर ओझा, डा. रत्नेश चौधरी, अतुल्य गुंजन, प्रकाश बबलू, शैलेन्द्र जी, रवि कुमार आदि नें भी शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी साथ हीं अन्य बिहार वासियों से भी अपील की इस मौके पर अमर शहीद दिनेश के परिवार के देखरेख के लिए अधिक से अधिक मदद करें.

इसी बीच पटना स्थित हमार टी वी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित प्रो. रामपाल अग्रवाल नूतन नें शहीद के पिता विंदा यादव को ११०००/=रुपये का चेक दिया और शहीद के माता पिता के भोजन खर्चे में कमी ना होने देने का बीड़ा उठाया और उनके ही पहल पर रोटरी पटना मिड टाउन के अध्यक्ष इंजिनिअर के. के. अग्रवाल ने उनकी बड़ी लड़की पूजा जिसकी उम्र ९ वर्ष है, जो उत्क्रमित मध्य विद्यालय सर्फुद्दीनपुर के वर्ग ६ कि छात्रा है, के पढाई की खर्च निर्वाह का बीड़ा उठा लिया. अच्छी शिक्षा दीक्षा का वादा किया. साथ हीं रोटरी पटना से विजय श्रीवास्तव ने दूसरी लड़की भारती कुमारी की पढ़ाई का बीड़ा उठा कर एक साहसिक कदम उठाया है और हमारे समाज को एक सन्देश भी दिया है.
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